कक्षा 9 भूगोल अध्याय 6 जनसंख्या एनसीईआरटी के प्रश्न उत्तर

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एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 भूगोल अध्याय 6

प्रश्न 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में सही विकल्प चुनिए:

(i) निम्नलिखित में से किसी क्षेत्र में प्रवास, आबादी की संख्या, वितरण एवं संरचना में परिवर्तन लाता है।(क) प्रस्थान करने वाले क्षेत्र में
(ख) आगमन वाले क्षेत्र में
(ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्रों में
(घ) इनमें से कोई नहीं।

उत्तर: (ग) प्रस्थान एवं आगमन दोनों क्षेत्रों में

(ii) जनसंख्या में बच्चों का एक बहुत बड़ा अनुपात निम्नलिखित में से किसका परिणाम है?

(क) उच्च जन्म दर
(ख) उच्च मृत्यु दर
(ग) उच्च जीवन दर
(घ) अधिक विवाहिता जोडे

उत्तर: (क) उच्च जन्म दर

(iii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक जनसंख्या वृद्धि का परिमाण दर्शाता है?

(क) एक क्षेत्र की कुल जनसंख्या
(ख) प्रत्येक वर्ष लोगों की संख्या में होने वाली वृद्धि
(ग) जनसंख्या वृद्धि की दर
(घ) प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या

उत्तर: (ख) प्रत्येक वर्ष लोगों की संख्या में होने वाली वृद्धि

(iv) 2011 की जनसंख्या के अनुसार एक साक्षर व्यक्ति वह है।

(क) जो अपने नाम को पढ़ एवं लिख सकता है।
(ख) जो किसी भी भाषा में पढ़ एवं लिख सकता है।
(ग) जिसकी उम्र 7 वर्ष है तथा वह किसी भी भाषा को समझ के साथ पढ़ एवं लिख सकता है।
(घ) जो पढ़ना-लिखना एवं अंकगणित, तीनों जानता है।

उत्तर: (ग) जिसकी उम्र 7 वर्ष है तथा वह किसी भी भाषा को समझ के साथ पढ़ एवं लिख सकता है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित के उत्तर संक्षेप में दें।

(i) जनसंख्या वृद्धि के महत्त्वपूर्ण घटकों की व्याख्या करें।
(ii) 1981 से भारत में जनसंख्या की वृद्धि दर क्यों घट रही है?
(iii) आयु संरचना, जन्म दर एव मृत्यु दर को परिभाषित करें।
(iv) प्रवास, जनसंख्या परिवर्तन का एक कारक।

उत्तर: (i) जनसंख्या वृद्धि के महत्त्वपूर्ण घटक जन्म दर, मृत्यु दर एवं प्रवास हैं।

  • जन्म दर (Birth Rate): एक वर्ष के दौरान 1000 लोगों पर जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या। यह जनसंख्या के आकार तथा घनत्व दोनों में वृद्धि करती है। यदि किसी वर्ष के दौरान जन्मों की संख्या मृतकों की संख्या से अधिक हो तो उस वर्ष के दौरान कुल जनसंख्या में वृद्धि हो जाएगी।
  • मृत्यु दर (Death rate): यह एक वर्ष के दौरान 1000 लोगों पर मृतकों की संख्या को प्रदर्शित करती है। यह जनसंख्या के आकार तथा घनत्व दोनों में कमी ला देता है। यदि किसी वर्ष के दौरान मृतकों की संख्या जन्मों की संख्या से अधिक हो तो उस वर्ष के दौरान कुल जनसंख्या में कमी हो जाएगी।
  • प्रवास (Migration): लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। जनसंख्या वितरण एवं उसके घटकों को परिवर्तित करने में प्रवास की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि यह आगमन तथा प्रस्थान दोनों ही स्थानों के जनसांख्यिकीय आंकड़ों को प्रभावित करता है। प्रवास आंतरिक (देश के भीतर) या अंतर्राष्ट्रीय (देशों के बीच) हो सकता है। आंतरिक प्रवास जनसंख्या के आकार में परिवर्तन नहीं करता लेकिन देश में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है।

(ii) 1981 से भारत में जन्म दर धीरे-धीरे घट रही है। इसके परिणामस्वरूप जनसंख्या वृद्धि में धीरे-धीरे कमी आ रही है।

(ग) आयु संरचनाः किसी देश में जनसंख्या की आयु संरचना वहाँ के विभिन्न आयु समूहों के लोगों की संख्या को बताता है। यह जनसंख्या की मूल विशेषताओं में से एक है।

  • जन्म दर (Birth rate): एक वर्ष के दौरान 1000 लोगों पर जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या ।
  • मृत्यु दर (Death rate): एक वर्ष के दौरान 1000 लोगों पर मृतकों की संख्या को प्रदर्शित करता है।

(घ) जनसंख्या में परिवर्तन में प्रवास की भी भूमिका होती है। जब लोग आजीविका की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं तो इस प्रक्रिया को प्रवास कहते हैं। जब देश के भीतर प्रवास होता है तो इसे आंतरिक प्रवास कहते हैं। जब प्रवास एक देश से दूसरे देश में होता है तो इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रवास कहते हैं। आंतरिक प्रवास से जनसंख्या के आकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन इससे जनसंख्या के वितरण में अंतर आ जाता है।

या

प्रवास (Migration): लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रवास कहते हैं। जनसंख्या वितरण एवं उसके घटकों को परिवर्तित करने में प्रवास की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि यह आगमन तथा प्रस्थान दोनों ही स्थानों के जनसांख्यिकीय आंकड़ों को प्रभावित करता है। प्रवास आंतरिक (देश के भीतर) या अंतर्राष्ट्रीय (देशों के बीच) हो सकता है। आंतरिक प्रवास जनसंख्या के आकार में परिवर्तन नहीं करता लेकिन देश में जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है।

  • प्रवास जनसंख्या के गठन एवं वितरण में बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • भारत में अधिकतर प्रवास ग्रामीण क्षेत्रों से ‘अपकर्षण (Push) कारक प्रभावी होते हैं। ये ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी एवं बेरोजगारी की प्रतिकूल अवस्थाएँ हैं तथा नगर का ‘कर्षण’ (Pull) प्रभाव रोजगार में वृद्धि एवं अच्छे जीवन स्तर को दर्शाता है। 1951 में शहरी जनसंख्या 17.29 प्रतिशत थी जो 2001 में बढ़कर 27.78 प्रतिशत हो गई।
  • 1991 से 2001 के बीच एक ही दशक के दौरान “दस लाख से अधिक” की जनसंख्या वाले महानगर 23 से बढकर 35 हो गए हैं।

प्रश्न 3. जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या परिवर्तन के बीच अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: जनसंख्या वृद्धि: जनसंख्या वृद्धि का अर्थ होता है, किसी विशेष समय अंतराल में जैसे, 10 वर्षों के भीतर, किसी देश/ राज्य के निवासियों की संख्या में परिवर्तन। इस प्रकार के परिवर्तन को दो प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है। पहला, सापेक्ष वृद्धि तथा दूसरा, प्रतिवर्ष होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के द्वारा।

जनसंख्या परिवर्तन: जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन की तीन मुख्य प्रक्रियाएं हैं – जन्म दर, मृत्यु दर एवं प्रवास। जन्म दर एवं मृत्यु दर के बीच का अंतर जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि है।

प्रश्न 4. व्यावसायिक संरचना एवं विकास के बीच क्या संबंध है?

उत्तर: व्यावसायिक संरचना से यह पता चलता है कि किस क्षेत्रक में कितने प्रतिशत लोग कार्यरत हैं। किसी खास क्षेत्रक में लोगों की सापेक्ष भागीदारी से हम अर्थव्यवस्था के विकास के स्तर को पहचान सकते हैं। इसे समझने के लिए अपने देश का उदाहरण लेते हैं। हमारे देश में आज भी अधिकतर लोग आजीविका के लिए प्राथमिक क्षेत्रक पर निर्भर हैं। इससे पता चलता है कि भारत अभी भी विकासशील देश है। विकसित देशों में आज अधिकतर लोग तृतीयक क्षेत्रक में कार्यरत हैं।

या

आर्थिक रूप से क्रियाशील जनसंख्या का प्रतिशत, विकास का एक महत्वपूर्ण सूचक होता है। विभिन्न प्रकार के व्यवसायों के अनुसार किए गए जनसंख्या के वितरण को व्यवसायिक संरचना कहा जाता है। किसी भी देश में विभिन्न व्यवसायों को करने वाले भिन्न-भिन्न लोग होते हैं। व्यवसायों को सामान्यत: प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक श्रेणीयों में वर्गीकृत किया जाता है।

प्राथमिक: इनमें कृषि, पशुपालन, वृक्षारोपण एवं मछली पालन तथा खनन आदि क्रियाएं शामिल हैं।
द्वितीयक: क्रियाकलापों में उत्पादन करने वाले उद्योग, भवन एवं निर्माण कार्य आते हैं।
तृतीयक: क्रियाकलापों में परिवहन, संचार,  प्रशासन तथा सेवाएं शामिल हैं।

विकसित एवं विकासशील देशों में विभिन्न क्रियाकलापों में कार्य करने वाले लोगों का अनुपात अलग- अलग होता है। विकसित देशों में द्वितीयक एवं तृतीयक क्रियाकलापों में कार्य करने वाले लोगों की संख्या का अनुपात अधिक होता है। विकासशील देशों में प्राथमिक क्रियाकलापों में कार्यरत लोगों का अनुपात अधिक होता है। भारत में कुल जनसंख्या का 64% भाग केवल कृषि कार्य करता है। द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की संख्या का अनुपात क्रमश: 13 तथा 20% है। वर्तमान समय में बढ़ते हुए औद्योगिक एवं शहरीकरण में वृद्धि होने का कारण द्वितीय एवं तृतीय क्षेत्रों में व्यवसायिक परिवर्तन हुआ है।

प्रश्न 5. स्वस्थ जनसंख्या कैसे लाभकारी है?

उत्तर: स्वस्थ जनसंख्या निम्नलिखित प्रकार से लाभकारी है-
(i) स्वस्थ जनसंख्या निश्चित रूप से देश के विकास में सहायक है होती है।
(ii) एक अस्वस्थ व्यक्ति की अपेक्षा एक स्वस्थ व्यक्ति अधिक घंटो तक काम कर सकता है।
(iii) स्वस्थ जनसंख्या उत्पादन को बढ़ाने में मदद कर सकती है जो राष्ट्रीय आय और जीवन स्तर मे बढ़ोतरी में सहायक होगी।
(iv) स्वस्थ जनसंख्या अधिक सकरात्मक सोच रख सकती हैं। यह देश को अधिक सुचारु रुप से चला सकती हैं।
(v) जनसंख्या राष्ट्रीय आय में बढ़ोतरी के द्वारा लोगों के स्तर में सुधार ला सकते हैं।
(vi) अस्वस्थ लोगों पर किए गए खर्च को सरकार विकास कार्य में लगाया जा सकती है।

प्रश्न 6. राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

उत्तर: राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है-
(i) यह 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करती हैं।
(ii) इसका मुख्य लक्ष्य शिशु मृत्यु दर को कम करना है।
(iii) इसका उद्देश्य टिकरोधी बीमारियों से बच्चों को मुक्त करना हैं।
(iv) यह लड़कियों की शादी की उम्र को बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
(v) यह परिवार नियोजन को एक जन केंद्रिक कार्यक्रम बनाती है।

या

भारत सरकार ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य को सुधारने तथा कल्याण एवं स्वैच्छिक आधार पर जिम्मेदार तथा सुनियोजित पितृत्व को बढ़ावा देने के लिए 1952 में विस्तृत परिवार नियोजन कार्यक्रम किया। राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 ने किशोर / किशोरियों की पहचान जनसंख्या के उस प्रमुख भाग के रूप में की, जिस पर बहुत ध्यान देने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 के उद्देश्यः
(क) 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना।
(ख) शिशु मृत्यु दर को प्रति 100 में 30 से कम करना।
(ग) व्यापक स्तर पर टीकारोधी बीमारियों से बच्चों को छुटकारा दिलाना।
(घ) लड़कियों की शादी की उम्र को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना।
(ङ) परिवार नियोजन को एक जन केंद्रित कार्यक्रम बनाना।
(च) किशोरों को पोषण सेवाएँ तथा खाद्य संपूरक सेवाएँ उपलब्ध कराना।
(छ) गर्भ निरोधक सेवाओं को पहुँच और खरीद के भीतर बनाना।
(झ) बाल-विवाह को रोकने के कानूनों को सुदृढ़ करना।

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