कक्षा 9 नागरिक शास्त्र पाठ 2 संविधान निर्माण एनसीईआरटी अभ्यास के प्रश्न उत्तर सरल अक्षरों में दिया गया है। इन एनसीईआरटी समाधान के माध्यम से छात्र परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकते हैं, जिससे छात्र परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। छात्रों के लिए कक्षा 9 नागरिक शास्त्रके प्रश्न उत्तर एनसीईआरटी किताब के अनुसार बनाये गए है। हिंदी मीडियम के छात्रों की मदद करने के लिए हमने एनसीईआरटी समाधान से संबंधित सभी सामग्रियों को नए सिलेबस के अनुसार संशोधित किया है। विद्यार्थी ncert solutions for class 9 social science civics chapter 2 hindi medium को यहाँ से निशुल्क में प्राप्त कर सकते हैं।
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 नागरिक शास्त्र अध्याय 2 संविधान निर्माण
1. नीचे कुछ गलत वाक्य है। हर एक वाक्य में की गई गलती पहचाने और इस अध्याय के आधार पर उसको ठीक करके लिखें:
(क) स्वतंत्रता के बाद देश लोकतांत्रिक हो या नहीं, इस विषय पर स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं ने अपना दिमाग खुला रखा था।
(ख) भारतीय संविधान सभा के सभी सदस्य संविधान में कही गई हरेक बात पर सहमत थे।
(ग) जिन देशों में संविधान है वहाँ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था ही होगी।
(घ) संविधान देश का सर्वोच्च कानून होता है, इसलिए इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।
उत्तर: (क) यह वाक्य गलत है। स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं को इस बारे में लगभग स्पष्ट ही था कि स्वतंत्रता के बाद देश में लोकतंत्र ही होगा। चूँकि उन्हें अंग्रेजी शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए एक लंबा और कठिन संघर्ष करना पड़ा था, स्वतंत्रता के पश्चात् वे देश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए वचनबद्ध थे।
(ख) यह भी गलत है। भारतीय संविधान सभा के सभी सदस्य संविधान की सभी व्यवस्थाओं के बारे में समान विचार नहीं रखते थे, कई सदस्य देश में एकात्मक शासन प्रणाली का समर्थन करते थे जबकि अन्य संघीय व्यवस्था के पक्ष में थे।
(ग) यह आवश्यक नहीं है कि जिस देश में संविधान है-वहाँ पर लोकतंत्रीय व्यवस्था ही होगी। संविधान में तानाशाही अथवा सैनिक शासन की व्यवस्था भी की जा सकती है।
(घ) यह बात ठीक नहीं है। संसद दो- तिहाई के बहुत से किसी धारा में भी संशोधन कर सकती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 में भी संविधान में संशोधन करने की प्रक्रिया का वर्णन किया गया है। सन् 1950 में संविधान के लागू होने से लेकर अब तक इसमें लगभग 100 बार संशोधन किया जा चुका है।
2. दक्षिण अफ्रीका को लोकतांत्रिक संविधान बनाने में इनमें से कौन-सा टकराव सबसे महत्वपूर्ण था:
(क) दक्षिण अफ्रीका और उसके पड़ोसी देशों का टकराव।
(ख) स्त्रियों और पुरुषों का टकराव।
(ग) गोरे अल्पसंख्यक और अश्वेत बहुसंख्यकों का टकराव।
(घ) रंगीन चमड़ी वाले बहुसंख्यकों और अश्वेत अल्पसंख्यकों का टकराव।
उत्तर: (ग) गोरे अल्पसंख्यक और अश्वेत बहुसंख्यकों का टकराव।
3. लोकतांत्रिक संविधान में इनमें से कौन-सा प्रावधान नहीं रहता?
(क) शासन प्रमुख के अधिकार
(ख) शासन प्रमुख का नाम
(ग) विधायिका के अधिकार
(घ) देश का नाम
उत्तर: (ख) ‘शासन प्रमुख का नाम’ का प्रावधान नहीं है।
4. संविधान निर्माण में इन नेताओं और उनकी भूमिका में मेल बैठाएँ:

5. जवाहर लाल नेहरू ने नियति के साथ साक्षात्कार वाले भाषण के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों का जवाब दें:
(क) नेहरू ने क्यों कहा कि भारत का भविष्य सुस्ताने और आराम करने का नहीं है?
(ख) नए भारत के सपने किस तरह विश्व से जुड़े हैं?
(ग) वे संविधान निर्माताओं से क्या शपथ चाहते थे?
(घ) “हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की कामना हर आँख से आँसू पोंछने की है।” वे इस कथन में किसका जिक्र कर रहे थे?
उत्तर: (क) ये शब्द जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त, 1947 की मध्य रात्रि के समय संविधान सभा में दिए गए अपने प्रसिद्ध भाषण में कहे थे उन्होंने कहा था कि भारत का भविष्य, जब भारत स्वतंत्र हो रहा है, आराम करने या सुस्ताने का नहीं है बल्कि उन वायदों को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करने का है जो लोगों से किए गए है। उनके अनुसार भारत की सेवा करने का अर्थ है, दुख और परेशानियों में पड़े लाखों करोडों लोगों की सेवा करना जो दरिद्रता, अज्ञान और बीमारियों, अवसर की असमानता से जूझ रहे हैं।
(ख) जवाहरलाल ने कहा था हम भारत और उसके लोगों तथा उससे भी अधिक मानवता की सेवा में समर्पित करें, यही हमारे लिए उचित है।
(ग) वे चाहते थे कि संविधान निर्माता यह शपथ ले कि वे अपने आपको भारत और उसके लोगों तथा मानवता की सेवा के लिए समर्पित करें।
(घ) वे इस कथन में महात्मा गांधी का जिक्र कर रहे हैं।
6. हमारे संविधान को दिशा देने वाले ये कुछ मूल्य और उनके अर्थ हैं। उन्हें आपस में मिलाकर दोबारा लिखिए।

7. कुछ दिन पहले नेपाल से आपके एक मित्र ने वहाँ की राजनैतिक स्थिति के बारे में आपको पत्र लिखा था। वहाँ अनेक राजनैतिक पार्टियाँ राजा के शासन का विरोध कर रही थीं। उनमें से कुछ का कहना था कि राजा द्वारा दिए गए मौजूदा संविधान में ही संशोधन करके चने हए प्रतिनिधियों को ज्यादा अधिकार दिए जा सकते हैं। अन्य पार्टियाँ नया गणतांत्रिक संविधान बनाने के लिए नई संविधान सभा गठित करने की मांग कर रही थीं। इस विषय में अपनी राय बताते हुए अपने मित्र को पत्र लिखें।
उत्तर:
प्रिय मित्र,
नेपाल की राजनीतिक स्थिति के बारे में आपने मुझे जो लिखा था उस संबंध में मेरा विचार यह है कि लोगों को एक नई संविधान सभा की स्थापना की माँग करनी चाहिए जो नेपाल के लिए गणतंत्रीय संविधान का निर्माण करे और वहाँ पर राजतंत्र को समाप्त कर दे।
सन् 2005 में नेपाल के सम्राट ने जनता द्वारा निर्वाचित सरकार को बर्खास्त कर दिया था और लोगों से सारे अधिकार तथा स्वतंत्रता वापस छीन लिए थे, जो उन्हें एक दशक पहले प्राप्त हुए थे।
8. भारत के लोकतंत्र के स्वरूप में विकास के प्रमुख कारणों के बारे में कुछ अलग-अलग विचार इस प्रकार हैं। आप इनमें से हर कथन को भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए कितना महत्वपूर्ण कारण मानते हैं?
(क) अंग्रेज शासको ने भारत को उपहार के रूप में लोकतांत्रिक व्यवस्था दी। हमने ब्रिटिश हुकमत के समय बनी प्रांतीय असेंबलियों के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में काम करने का प्रशिक्षण पाया।
(ख) हमारे स्वतंत्रता संग्राम ने औपनिवेशिक शोषण और भारतीय लोगों को तरह-तरह की आजादी न दिए जाने का विरोध किया। ऐसे में स्वतंत्र भारत को लोकतांत्रिक होना ही था।
(ग) हमारे राष्ट्रवादी नेताओं की आस्था लोकतंत्र में थी। अनेक नव स्वतंत्र राष्ट्रों में लोकतंत्र का न आना हमारे नेताओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका की रेखांकित करता है।
उत्तर: (क) ब्रिटिश हुकूमत के समय बनी प्रांतीय असेंबलियों के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में काम करने का प्रशिक्षण पाया परंतु भारत को लोकतंत्रीय व्यवस्था अंग्रेजी शासकों से उपहार के रूप में नहीं मिली है। अंग्रेजों से स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए भारतीयों को इसके साथ एक लंबा संघर्ष करना पड़ा और अनेक कुरबानियाँ देनी पड़ी थी।
(ख) चूंकि अंग्रेजों के अलोकतंत्रीय शासन काल के दौरान भारत के सभी लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर भाग लिया था और इकट्ठे मिलकर ब्रिटिश साम्राज्य का मुकाबला किया था इसलिए भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था लाना आवश्यक बन गया था।
(ग) यह बात सच है कि भाग्यवान भारतीयों को ऐसे नेता मिले जिनकी सोच लोकतंत्रीय थी। इसलिए स्वतंत्रता के पश्चात लोकतांत्रिक व्यवस्था का लाया जाना स्वाभाविक ही था।
9. 1912 में प्रकाशित ‘विवाहित महिलाओं के लिए आचरण पुस्तक के निम्नलिखित अंश को पढ़ें:
“ईश्वर ने औरत पति को शारीरिक और भावनात्मक, दोनों ही तरह से ज्यादा नाजुक बनाया है, उन्हें आत्म रक्षा के भी योग्य नहीं बनाया है। इसलिए ईश्वर ने ही उन्हें जीवन भर पुरुषों के संरक्षण में रहने का भाग्य दिया है कभी पिता के, कभी पति के और कभी पुत्र के। इसलिए महिलाओं को निराश होने की जगह इस बात से अनुगृहीत होना चाहिए कि वे अपने आपको पुरुषों की सेवा में समर्पित कर सकती हैं।” क्या इस अनुच्छेद में व्यक्त मूल्य संविधान के दर्शन से मेल खाते हैं या वे संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं?
उत्तर: इस अनुच्छेद में व्यक्त मूल्य संविधान में दिए गए मूल्यों से मेल नहीं खाते. इन मूल्यों का वर्णन संविधान की प्रस्तावना में किया गया है। प्रस्तावना के आरंभिक शब्द हैं- “हम भारत के लोग” जिसका अर्थ है पुरुष तथा महिलाएँ दोनों। यह सभी नागरिकों (दोनों महिलाएँ एवं पुरुषों) को सामाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक न्याय दिलाने की बात करती है, इसमें कहा गया है कि नागरिकों के साथ जाति, धर्म तथा लिग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा। सामाजिक असमानताओं को कम किया जाएगा और सरकार सभी की भलाई के लिए कार्य करेगी, कानून की दृष्टि में सभी समान होंगे। ऊपर दिए गए पहरे में महिलाओं की जिस स्थिति का वर्णन किया गया है वह संविधान में दिए गए मूल्यों के अनुसार नहीं है।
10. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। क्या आप उनसे सहमत है? अपने कारण भी बताइए।
(क) संविधान के नियमों की हैसियत किसी भी अन्य कानून के बराबर है।
(ख ) संविधान बताता है कि शासन व्यवस्था के विविध अंगों का गठन किस तरह होगा।
(ग) नागरिकों के अधिकार और सरकार की सत्ता की सीमाओं का उल्लेख भी संविधान में स्पष्ट रूप से है।
(घ) संविधान संस्थाओं की चर्चा करता है, उसका मूल्यों से कुछ लेना-देना नहीं है।
उत्तर:(क) यह कथन ठीक नहीं है, एक साधारण कानून संसद द्वारा पास किया जाता है और संसद जब चाहे उसमें अपनी इच्छानुसार परिवर्तन कर सकती है। इसके विपरीत संविधान के नियमों का महत्त्व अधिक होता है जिन्हें संसद को भी मानना पड़ता है। इन नियमों में परिवर्तन करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया को अपनाना पड़ता है।
(ख) ठीक।
(ग) ठीक।
(घ) यह बात सत्य नहीं है क्योंकि संविधान जितना संस्थाओं से संबंधित है उतना ही वह मूल्यों से संबंधित भी है।