कक्षा 7 सामाजिक विज्ञान भूगोल पाठ 5 जल एनसीईआरटी अभ्यास के प्रश्न उत्तर सरल अक्षरों में दिया गया है। इन एनसीईआरटी समाधान के माध्यम से छात्र परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकते हैं। जिससे छात्र कक्षा 7 भूगोल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। छात्रों के लिए कक्षा 7 भूगोल के प्रश्न उत्तर एनसीईआरटी किताब के अनुसार बनाये गए है। कक्षा 7 हिंदी मीडियम के छात्रों की मदद करने के लिए, हमने एनसीईआरटी समाधान से संबंधित सभी सामग्रियों को नए सिलेबस के अनुसार संशोधित किया है। विद्यार्थी ncert solutions for class 7 social science geography chapter 5 hindi medium को यहाँ से निशुल्क में प्राप्त कर सकते हैं।
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 भूगोल अध्याय 5 जल
1. आपके विचार से महिलाओं के बारे में प्रचलित रूढ़िवादी धारणा कि वे क्या कर सकती हैं और क्या नहीं, उनके समानता के अधिकार को कैसे प्रभावित करती है?
उत्तर: समानता का अधिकार इस बात पर आधारित है कि हर व्यक्ति एक समान है और हर किसी को अपना जीवन सार्थक बनाने के लिए किसी रोकटोक का सामना न करना पड़े। महिलाओं के बारे में प्रचलित रूढ़िवादी धारणा है कि वे कुछ काम कर सकती हैं लेकिन कुछ काम महिलाओं के लिए नहीं बने हैं। इसलिए कई घरों में महिलाओं को कुछ क्षेत्रों में जाने से रोका जाता है। इससे कई बार प्रतिभा या लगन होने के बावजूद महिलाएँ अपने पसंदीदा क्षेत्र में काम करने से वंचित रह जाती हैं। यह बात उन्हें समानता के अधिकार से किसी न किसी रूप में वंचित करती है।
2. कोई एक कारण बताइए जिसकी वजह से राससुंदरी देवी, रमाबाई और रुकैया हुसैन के लिए अक्षर ज्ञान इतना महत्वपूर्ण था।
उत्तर: राससुंदरी देवी, रमाबाई और रुकैया हुसैन उन महिलाओं में से थीं जो जीवन में कुछ बड़ा करना चाहती थीं। ऐसा करने के लिए हौसले के साथ साथ सही ज्ञान का होना भी जरूरी है। जब कोई पढ़ना लिखना सीख लेता है तो उसके लिए ज्ञान प्राप्त करना अधिक सुलभ हो जाता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि इन महिलाओं के लिए अक्षर ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण था। अक्षर ज्ञान के बिना ना तो वे किताबें लिख पातीं और ना ही स्त्री शिक्षा के लिए योगदान दे पातीं।
3. “निर्धन बालिकाएँ पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं, क्योंकि शिक्षा में उनकी रुचि नहीं है।“ पृष्ठ 17 पर दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर स्पष्ट कीजिए कि यह कथन सही क्यों नहीं है?
उत्तर: यह कथन सत्य नहीं है, क्योंकि निर्धन बालिकाएँ पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं, इसका कारण उनकी रुचि न होना नहीं है, बल्कि दूसरे अनेक कारण हैं|
- दलित, आदिवासी और मुस्लिम वर्ग की लड़कियों के स्कूल छोड़ देने के अनेक कारण हैं। देश के अनेक भागों में विशेषकर ग्रामीण और गरीब क्षेत्रों में नियमित रूप से पढ़ाने के लिए न उचित स्कूल हैं न ही शिक्षक। यदि विद्यालय घर के पास नहीं हो और लाने-ले जाने के लिए किसी साधन जैसे बस या वैन आदि की व्यवस्था न हो तो अभिभावक लड़कियों को स्कूल नहीं भेजना चाहते।
- कुछ परिवार अत्यंत निर्धन होते हैं और अपने सभी बच्चों को पढ़ाने का खर्चा नहीं उठा पाते हैं। ऐसी स्थिति में लड़कों को प्राथमिकता मिलती है और लड़कियों को नहीं पढ़ाया जाता।
- बहुत से बच्चे इसलिए भी स्कूल छोड़ देते हैं, क्योंकि उनके साथ उनके शिक्षक और सहपाठी भेदभाव करते हैं।
4. क्या आप महिला आंदोलन द्वारा व्यवहार में लाए जाने वाले संघर्ष के दो तरीकों के बारे में बता सकते हैं? महिलाएँ क्या कर सकती हैं और क्या नहीं, इस विषय पर आपको रूढ़ियों के विरुद्ध संघर्ष करना पड़े, तो आप पढ़े हुए तरीकों में कौन से तरीकों का उपयोग करेंगे? आप किसी विशेष तरीके का उपयोग क्यों करेंगे?
उत्तर: संघर्ष के दो प्रमुख तरीके
- औरतों के अधिकारों के संबंधों में समाज में जागरूकता बढ़ाना।
- भेदभाव और हिंसा का विरोध करना।
यदि हमें रूढ़ियों के विरुद्ध संघर्ष करना पड़े तो हम प्रयास करेंगे कि समाज में औरतों के अधिकारों के संबंध में जागरूकता फैलाया जाए। लोगों को यह बतलाया जाए कि महिलाएँ भी समाज के अंग हैं और महिलाओं के विकास से ही परिवार और समाज का विकास हो सकता है। समाज को यह बतलाया जाए कि हमारे पूर्वज पढ़े-लिखे नहीं थे, इसलिए उनके अन्दर महिलाओं को लेकर संकीर्ण मानसिकता थी। अब हम संकीर्ण मानसिकता को छोड़कर महिलाओं से होने वाले भेदभाव को त्याग करें और एक आदर्श समाज का निर्माण करें।