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एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 इतिहास अध्याय 10 इमारतें, चित्र तथा किताब
प्रश्न 1: निम्नलिखित को सुमेलित करो।
कॉलम 1 | कॉलम 2 |
(a) स्तूप | (1) देवी देवता की मूर्ति स्थापित करने की जगह |
(b) शिखर | (2) टीला |
(c) मण्डप | (3) स्तूप के चारो तरफ वृताकार पथ |
(d) गर्भगृह | (4) मंदिर में लोगों के इकट्ठा होने की जगह |
(e) प्रदक्षिणापथ | (5) गर्भगृह के उपर लम्बाई में निर्माण |
उत्तर: (a) 2, (b) 5, (c) 4, (d) 1, (e) 3
प्रश्न 2: खाली जगहों को भरो।
(क) ——- एक बड़े गणितज्ञ थे।
(ख) ——- में देवी देवताओं की कहानियाँ मिलती है।
(ग) ——- को संस्कृत रामायण का लेखक माना जाता है।
(घ) ——- और ——- दो तमिल महाकाव्य है।
उत्तर: (क) आर्यभट्ट (ख) पुराण (ग) वाल्मिकी (घ) सिलप्पदिकारम, मणिमेखलई
प्रश्न 3: धातुओं के प्रयोग पर जिन अध्यायों में चर्चा हुई है, उनकी सूची बनाओ। धातुओं से बनी किन किन चीजों के बारे में चर्चा हुई है या उन्हें दिखाया गया है?
उत्तर: धातुओं के प्रयोग पर अध्याय 4,8 और 9 में चर्चा हुई है। धातुओं से बनी चीजे जैसे- हलों के फाल, सड़सी और कुल्हाड़ी के बारे में चर्चा हुई है।
प्रश्न 4: पृष्ठ 122 पर लिखी कहानी को पढ़ो। जिन राजाओं के बारे में तुमने अध्याय 6 और 11 पढ़ा है उससे यह बंदर राजा कैसे भिन्न या सामान था?
उत्तर: दोनों की कहानियों के आधार पर दोनों राजाओं में कुछ समानताएँ थी और कुछ भिन्नताएँ थी। जहाँ बहुत राजा बड़ी बड़ी उपाधियाँ धारण करते थे, वहीं बंदर राजा के पास कोई उपाधि नहीं थी। जिस तरह ज्यादातर राजा अपनी प्रजा का ख्याल रखते थे उसी तरह बंदर राजा ने भी अपनी प्रजा का ख्याल रखते हुए अपनी जान दे दी।
5. और भी जानकारी इकट्ठी कर किसी महाकाव्य से एक कहानी सुनाओ।
उत्तर: हमारे महाकाव्य में बहुत सारी कहानियाँ हैं, जो हमें प्रभावित करती हैं। वे कहानियाँ आदर्श जीवन के लिए हमारा मार्गदर्शन करती हैं और हमें शिक्षा देती हैं। ऐसे ही महाकाव्य महाभारत और रामायण हैं। ऐसी ही एक कहानी महाभारत महाकाव्य में है, इसमें कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध की कहानी है। दोनों ही पक्ष युद्ध जीतने के लिए अपने-अपने नाते-रिश्तेदारों और अन्य राजाओं को अपने साथ मिलाना चाहते थे। श्रीकृष्ण महान शक्तिशाली और भगवान की शक्तियाँ रखता था। वह दोनों ही पक्षों से संबंधित था। इसलिए दुर्योधन जो कौरवों में सबसे बड़े थे। सहायता माँगने के लिए पहुँचे। ठीक उसी दिन पांडवों में से एक अर्जुन भी सहायता माँगने के लिए कृष्ण के पास पहुँचे। श्रीकृष्ण उस समय सोये हुए थे, दुर्योधन घमंडी था, इसलिए वह श्रीकृष्ण के सिर की तरफ बैठ गया। अर्जुन दुर्योधन के बाद पहुँचे और वह विनम्र भी थे इसलिए पैर की दिशा में बैठ गए। श्रीकृष्ण ने पहले ही घोषणा कर रखी थी कि जो भी मेरे पास पहले सहायता माँगने आएगा मैं उसका साथ दूंगा। श्रीकृष्णजी जैसे ही नींद से जागे उन्होंने अर्जुन को देखा। उन्होंने कहा कि वह अर्जुन का साथ देंगे। दुर्योधन ने इसका विरोध किया और कहा कि मैं पहले सहायता माँगने आया हूँ। कृष्ण ने कहा कि अगर हम किसी से भी कुछ प्राप्त करना चाहते हैं तो इसके लिए हमें विनम्र होना पड़ेगा। इस प्रकार दुर्योधन ने श्रीकृष्ण के साथ को खो दिया। इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि हम जिससे सहायता की अपेक्षा करते हैं उनके साथ उदंडता का व्यवहार नहीं करना चाहिए।
6. इमारतों तथा स्मारकों को अन्य प्रकार से सक्षम व्यक्तियों (विकलांग) के लिए और अधिक प्रवेश योग्य कैसे बनाया जाए? इसके लिए सुझावों की एक सूची बनाओ।
उत्तर: इमारतों तथा स्मारकों में ढलान वाले प्रवेश द्वार की सुविधा होनी चाहिए।
- इमारतों तथा स्मारकों में ढलान वाले प्रवेश द्वार के साथ रेलिंग की सुविधा होनी चाहिए ताकि पहिए | वाली कुर्सी का आसानी से प्रयोग किया जा सके।
- इस तरह के व्यक्तियों के लिए उचित रोशनी का प्रबंध होना चाहिए तथा खाली स्थान से अलग प्रवेश द्वार की व्यवस्था होनी चाहिए। |
7. कागज़ के अधिक से अधिक उपयोगों की एक सूची बनाओ।
उत्तर: कागज बहुत महत्त्वपूर्ण है। इसका प्रयोग विभिन्न रूपों में किया जाता है। इसके कुछ प्रयोग नीचे दिए गए हैं
- हम जो किताब पढ़ते हैं वह कागज पर ही छपी होती है।
- हम लिखने के लिए भी कागज का प्रयोग करते हैं।
- वस्तुओं के पैकिट बनाने के लिए भी कागज का प्रयोग होता है। |
- खेल का सामान जैसे कि बनाने में भी कागज का प्रयोग होता है।
- कृत्रिम गुलदस्ता बनाने में भी कागज का प्रयोग होता है।
8. इस अध्याय में बताए गए स्थानों में से तुम्हें किसी एक को देखने का मौका मिले तो किसे चुनोगे और क्यों?
उत्तर: मैं महरौली (दिल्ली) को देखना पसन्द करूंगा, मैं वहाँ लौह स्तंभ देख सकेंगा। यह भारतीय शिल्पकारों की कुशलता का एक अद्भुत उदाहरण है। आश्चर्य की बात यह है इतने दिनों के बाद भी इसमें जंग नहीं लगा। इसी परिसर में कुतुबमीनार वास्तव में एक महान स्मारक है। मैं महरौली में एक मनोहर स्मारक देख सकेंगा।
Extra Questions Answers
प्रश्न 1: कुतुबमीनार का निर्माण कब हुआ था?
उत्तर: लगभग 1500 साल पहले
प्रश्न 2: कुतुबमीनार के पास जो लौह-स्तम्भ है, उसे किस शासक ने बनवाया था?
उत्तर: गुप्त साम्राज्य के शासक चंद्रगुप्त ने
प्रश्न 3: एक ऐसे मंदिर का नाम बताओ जो एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है?
उत्तर: महाबलिपुरम का एकाष्मिक मंदिर
प्रश्न 4: प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य सिलप्पदिकारम की रचना किसने की?
उत्तर: कवि इलांगो ने
प्रश्न 5: पुराण और महाभारत को किसने संकलित किया?
उत्तर: वेदव्यास नामक ॠषि ने
प्रश्न 6: आर्यभट्टीयम नामक किताब कसने लिखी?
उत्तर: आर्यभट्ट ने
प्रश्न 7: शून्य की खोज किसने की?
उत्तर: आर्यभट ने
प्रश्न 8: कागज का आविष्कार कब और किसने किया?
उत्तर: कागज का आविष्कार 1900 साल पहले लून नामक व्यक्ति ने चीन में किया?
प्रश्न 9: आम लोगों द्वारा कही कहानियों को किस किताब में संग्रहित किया गया है?
उत्तर: जातक कथा और पंचतंत्र में
प्रश्न 10: स्तूप की संरचना के बारे में विस्तार से बताएँ।
उत्तर: स्तूप का शाब्दिक अर्थ ‘टीला’ होता है। इसे बुद्ध के अनुययियों द्वारा बनवाया जाता था। स्तूप के बीच में एक डब्बा रखा जाता था। इस डब्बे में बुद्ध या उसके शिष्यों के शरीर के अवशेष रखे जाते थे। कभी कभी उन लोगों द्वारा प्रयोग की गई कीमती चीजें, पत्थर और सिक्के भी रखे जाते थे। जिसे धातु मंजूषा कहा जाता कहा जाता है। इसे मिट्टी से टीलानुमा आकार में ढक दिया जाता था। बाद में इसे ईंटो से ढ़क दिया गया। बाद के काल में इसे तराशे हुए पत्थरों से ढक दिया गया। स्तूपों के चारों ओर एक प्रदक्षिणा पथ बनाया जाता था। जिस पर बुद्ध के भक्त घड़ी की सूई की दिशा में प्रदक्षिणा करते थे। इस पथ को रेलिंग से घेर दिया जाता था, जिसे वेदिका कहते हैं। वेदिका में एक प्रवेश द्वार भी बनाया जाता था। इन रेलिंगो और प्रवेश द्वार पर नक्काशी की जाती थी।